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    • Gurmit

      माननीय गवर्नर

      लेफ्टिनेंट जनरल गुरुमीत सिंह, PVSM, UYSM, AVSM, VSM (सेवानिवृत्त)

    • Pushkar

      माननीय मुख्यमंत्री

      श्री पुष्कर सिंह धामी

    • MISS RANJANA RAJGURU

      सचिव - आयुष और आयुष शिक्षा

      सुश्री रंजना राजगुरु, IAS

    • Dr. J. L Firmal

      निदेशक, होम्योपैथिक चिकित्सा सेवाऐं

      डॉ. जे. एल. फिरमाल

    विभाग के बारे में

    Directorate of Homoeopathicहोम्योपैथी की खोज मूल रूप से ऐलोपैथिक(एम.बी.बी.एस./एम.डी.)जर्मनचिकित्सक डा0 सैमुअल हैनिमैन (1755-1843) द्वारा की गयी थी। यह ‘‘समः’’, समम्, शमयति’’ या समरूपता’’ सिद्वान्त पर अधारित एक चिकित्सा प्रणाली है। यह दवाओं द्वारा रोगी का उपचार करने की एक ऐसी विधि है जिसमें किसी स्वस्थ्य व्यक्ति में प्राकृतिक रोग को अनुरूपण करके समान लक्षण उत्पन्न किया जाता है। जिससे रोगग्रस्त व्यक्ति का उपचार किया जा सकता है।

    होम्योपैथिक दवाओं को पौंधों, पशुओं, खनिज और अन्य प्राकृतिक पदार्थों से उर्जाकरण या अंतः शक्तिकरण नामक एक मानक विधि के माध्यम से तैयार किया जाता है। आज होम्योपैथी 85 से अधिक देशों में प्रचलित है और 100 करोड़ से अधिक लोगों के विश्वास का प्रतीक है। होम्योपैथी दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में विकसित है।

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    L.M. निदेशक का संदेश

    निदेशक का संदेश

    होम्योपैथी की खोज मूल रूप से ऐलोपैथिक (एम.बी.बी.एस./एम.डी.) जर्मन चिकित्सक डा0 सैमुअल हैनिमैन (1755-1843) द्वारा की गयी थी। यह ‘‘समः’’, समम्, शमयति’’ या समरूपता’’ सिद्वान्त पर अधारित एक चिकित्सा प्रणाली है। यह दवाओं द्वारा रोगी का उपचार करने की एक ऐसी विधि है.